Murari Devi Temple in Sundernagar Mandi ... - himachalnewsline

MURARI DEVI TEMPLE

मुरारी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के सुंदर नगर (मंडी) में देखने के लिए एक महान और प्रसिद्ध स्थान है।यह मंदिर सुंदर नगर के पश्चिम में है। यह मंदिर sundernagar मे balh से समुद्रतल से 7000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। 

maa murari devi temple


यह मंदिर सुंदरनगर के पश्चिम में है मुरारी धार नामक एक पवित्र पहाड़ी की चोटी पर  स्थित है। जिसे सिकंदरारा री धार (प्राचीन नाम) के नाम से भी जाना जाता है।
यह माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने अपने "AGYATWAAS" के दौरान की थी।
 मुरारी देवी में कुछ चट्टानें भी हैं जिन पर कुछ बड़े मानव पैरों के निशान देखे जा सकते हैं और स्थानीय लोगों का कहना है कि ये फुट प्रिंट पांडवों के हैं।

The story of Mata Murari Devi Ji in Hindi:

प्राचीन काल में पृथ्वी पर मूर नामक एक पराक्रमी दैत्य हुआ करता था । उस दैत्य ने देवताओं को पराजित करने के उद्देश्य से ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की और उनसे वरदान मांगा कि मैं अमर हो जाऊं  और कोई भी देवता या मानव मुझे ना मार सके।ब्रह्मा जी भी विधि के विधानों  से बंधे हुए थे । इसलिए तब ब्रह्मा जी ने कहा कि मैं विधि के विधानों से बन्धा हूं, इसलिये तुम्हें अमर होने का वरदान नहीं देते हुए, मैं तुम्हें ऐसा वरदान देता हूं कि तुम्हारा वध किसी भी देवता, मानव या जानवर के द्वारा नहीं होगा बल्कि एक कन्या के हाथों से होगा।

ऐसा सुनते ही मुर बहुत खुश हो गया ।  घमण्डी मूर दैत्य ने सोचा कि मैं तो इतना शक्तिशाली हो गया हूं, एक साधारण एवं अबला कन्या मेरा वध कहां कर पायेगी? मैं तो अमर ही हो गया हूं। ये सोचकर उसने स्वर्ग पर आक्रमण शुरु कर दिए देवताओ और मुर मे युद्ध हुआ लेकिन देवता मुर को पराजित न कर सके ।लेकिन मूर दैत्य
ने  देवताओं को पराजित कर स्वर्ग से निष्कासित कर दिया और स्वयं स्वर्ग का राजा बन बैठा। 
समस्त सृष्टि उसके अत्याचारों से त्राहि-त्राहि कर उठी।  
सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए, तो भगवान ने कहा चिंता मत करो, मैं अवश्य आपके कष्टों का निवारण करूँगा ।भगवान विष्णु और मूर दैत्य का आपस में युद्ध आरम्भ हो गया जो दीर्घकाल तक चलता रहा। 
युद्ध को समाप्त न होता देख कर भगवान नारायण को स्मरण हुआ की मूर का वध केवल कन्या के हाथों ही हो सकता है।
ऐसा विचार करके वो हिमालय में स्थित सिकन्दरा धार (सिकन्दरा री धार) नामक पहाड़ी पर एक गुफा में जाकर लेट गए। यानिकी जिस स्थान को आज हम मुरारी देवी नाम से भी जानते हैं।मूर भगवान विष्णु जी को ढूंढता हुआ मुरारी देवी जा पहुंचा तो उस ने देखा की भगवान निद्रा में हैं और हथियार से भगवान पे वार करूं,ऐसा सोचा तो भगवान के शरीर से 5 ज्ञानेद्रियों, 5 कर्मेंद्रियों, 5 शरीर कोषों और मन ऐसी 16 इन्द्रियों से एक कन्या उत्पन्न हुयी।
 उस कन्या (Murari Devi) ने मूर को युद्ध के लिए ललकारा। तब कन्या और मूर दैत्य का घोर युद्ध हुआ। 
 उस देवी ने अपने शस्त्रों के प्रहार से मूर दैत्य को मार डाला। मूर दैत्य का वध करने के कारण भगवान विष्णु ने उस दिव्या कन्या को मुरारी देवी के नाम से संबोधित किया। 
 एक अन्य मत के अनुसार भगवान विष्णु जिन्हें मुरारी भी कहा जाता है, उनसे उत्पन्न होने के कारण ये देवी माता मुरारी (Murari Devi) के नाम से प्रसिद्ध हुईं एवं उसी 
 पहाड़ी पर दो पिण्डियों के रूप में स्थापित हो गयीं जिनमें से एक पिण्डी को शान्तकन्या और दूसरी को कालरात्री का स्वरूप माना गया है। माँ मुरारी के कारण ये पहाड़ी
 मुरारी धार के नाम से प्रसिद्ध हुई।


द्वापर युग में जब पांडव अपना अज्ञातवास काट रहे थे, 
तब वो लोग इस स्थान पर आये। देवी ने उन्हें दर्शन देकर कहा कि पहाड़ की चोटी पर जाकर खुदाई करो,
 वहां पर तुम्हें मेरी दो पिण्डियां मिलेंगी। उस स्थान पर एक मन्दिर बना कर उन पिण्डियों की स्थापना करो। 
 माता के आदेशनुसार पांडवों ने वहां एक भव्य मन्दिर का निर्माण किया। आज भी Murari Devi मन्दिर से थोड़े नीचे जाकर देखें तो वहां पर पांडवों के पदचिन्ह कुछ पत्थरों पर देखे जा सकते हैं।
सन् 1992 में इस क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गावों के माता भक्तों ने एक कमेटी का गठन किया एवं उसके बाद अगाध श्रद्धा रखने वालों के आर्थिक सहयोग एवं कमेटी की निष्ठा,
 कर्मठता, सेवाभाव, इमानदारी, श्रद्धा व समर्पण के एक-एक पुष्प से यह अभूतपूर्व प्रकल्प जनसम्मुख है। 
 विशाल गगनचुम्बी भव्य मन्दिर, सरायं, भंडारा भवन व संपत्ति रूपी धरोहर इस शक्तिपीठ की अब विरासत बन चुकी है।
  Murari Devi मन्दिर परिसर में ही सन् 2005 से अटूट भंडारे का शुभारंभ बाबा कल्याण दास (काला बाबा जी) द्वारा किया गया। मन्दिर सरायं में एक हज़ार से अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था है। 

Maa Murari Devi Mela:

माता मुरारी के सभी भक्तों को ये जानकर अति प्रसन्नता होगी कि माता का 3 दिन तक चलने वाला पारम्परिक और धार्मिक मेला 25 मई से आरम्भ होता है।और 28 मई को समाप्त हो जाता हैं। पिछले कुछ वर्षॊं से ये धार्मिक मेला अपनी विशिष्ट पहचान खोता जा रहा है। 
 पहले इस मेले में बहुत से लोग आते थे परन्तु विगत कुछ वर्षों से मेले के समुचित प्रचार के अभाव के कारण लोगों का इस मेले में पहुंचना काफ़ी कम हो गया है।
मेले के आखिरी दिन छिंज (कुश्ती) का आयोजन भी किया जाता है जिसमें दूर-दूर से पहलवान आते हैं। 
मेले के आखिरी दिन छिंज (कुश्ती) का आयोजन भी किया जाता है जिसमें दूर-दूर से पहलवान आते हैं।


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 ताकि अधिक से अधिक लोग पधार कर मेले की शोभा को बढ़ाएं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करें।

  Way to reach Murari devi mandir:

view form murari devi

 मुरारी देवी मंदिर तक पहुंचने के दो रास्ते हैं। मुख्य मार्ग सुंदर नगर से स्वाडाघाट तक है जो लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर है। 
 आप बस या किसी अन्य वाहन से स्वारघाट पहुंच सकते हैं। सुंदर नगर से स्वाडाघाट के लिए बस का समय उनके मार्गों के साथ नीचे दिया गया है-

  Departure Bus Route & Name Arrival (Swahraghat)
07:15 AM Sunder Nagar-Chah Ka Dohra (Friends Travels) 08:15 AM
07:30 AM Sunder Nagar-Chah Ka Dohra (H.R.T.C.) 08:30 AM
08:30 AM Sunder Nagar-Chah Ka Dohra (Friends Travels) 09:30 AM
11:50 AM Sunder Nagar-Chah Ka Dohra (Friends Travels) 01:00 PM
01:00 PM Sunder Nagar-Jahu (H.R.T.C.) 02:00 PM
02:30 PM Sunder Nagar-Chah Ka Dohra (Friends Travels) 03:40 PM
03:40 PM Sunder Nagar-Chah Ka Dohra (Murari Travels) 04:40 PM
05:00 PM Sunder Nagar-Chah Ka Dohra (New Friends Coach) 06:00 PM
05:15 PM Sunder Nagar-Chah Ka Dohra (Friends Travels) 06:15 PM
05:30 PM Sunder Nagar-Trifalghat (H.R.T.C.) 06:30 PM
The total bus fare is Rs.22 (H.R.T.C.) & Rs.20 (Private Buses)

स्वारघाट पहुंचने के बाद, आपको मंदिर तक पहुँचने के लिए एक पैदल मार्ग पर ऊपर की ओर चलना होगा जो कि स्वराघाट से लगभग 2 KM की दूरी पर है। 
स्वारघाट में कुछ दुकानें हैं जहां आप कोल्ड ड्रिंक्स, मिठाई और अन्य पूजा सहमगरी खरीद सकते हैं।
मुरारी देवी मंदिर सुंदर नगर का रास्ता
मंदिर का निर्माण करने का एक अन्य तरीका सुंदर नगर-मुरारी देवी (लेदा के माध्यम से) सड़क है जो निर्माणाधीन है, इसलिए अब तक कोई बस सेवा उपलब्ध नहीं है, लेकिन आप मोटर बाइक, स्कूटर और चार पहिया वाहन जैसे अन्य वाहनों द्वारा पहुंच सकते हैं।

जय माता मुरारी देवी।

धन्यवाद। 


जय माँ मुरारी । बोल सांचे दरबार की जय।